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झामुमो में मान-सम्मान नहीं मिला तो पुत्र व पुत्री सहित भाजपा में शामिल होंगे दुलाल भूइंया

 श्री दर्पण न्यूज, जमशेदपुर : झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता और राज्य के पूर्व मंत्री दुलाल भूईया इन दिनों पार्टी अलाकमान के व्यवहार से खिन्न हैं। पार्टी में अपनी अनदेखी उन्हें टीस मारती है। एक संक्षिप्त बातचीत के दौरान दुलाल भुईयां ने कहा की आरंभ से ही झारखंड आंदोलन से जुड़े रहे। कई बार जेल गए। पुलिस की लाठियां खाई। आज भी शरीर पर पुलिस की लाठी के निशान हैं। गुरुजी( शिबू सोरेन) ने खूब सम्मान दिया। हर मौके पर याद करते और एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में झारखंड आंदोलन में मेरी भूमिका की सराहना करते. सुख-दुख का हर हमेशा ख्याल रखते। लेकिन आज स्थिति बदल गई है।

मुख्मंत्री हेमंत सोरेन की अनदेखी ने तोड़ दिया है दुलाल दा को

आज पार्टी की वैसी स्थिति नहीं रही। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से वह सम्मान नहीं मिला जिसकी उनसे अपेक्षा थी। लगातार की जा रही अनदेखी ने दिल को तोड़ दिया है।
बातचीत के क्रम में दुलाल भूईया ने कहा कि जहां मान सम्मान मिलेगा वहीं रहेंगे । जहां मान सम्मान नहीं वहां काहे को रहना।
यह पूछने पर कि निकट भविष्य में वे भाजपा में जा सकते हैं दुलाल भूईया ने कहा समय का इंतजार है। अगर भाजपा मान सम्मान देगी । सम्मान के साथ पार्टी में शामिल करेगी तो जरूर जाएंगे। अब तो उनके बच्चे बड़े हो गए हैं। हर कदम पर उनकी सलाह मिलती है परिवार की राय के साथ ही वह आगे बढ़ेंगे।

बेटा झारखंड हाईकोर्ट में वकील व बेटी ने लंदन से किया बीबीए

दुलाल दा के पुत्र  और हाईकोर्ट झारखंड के अधिवक्ता विपल्लव भुइंया

 

जानकारी हो कि दुलाल दा के पुत्र विप्लव ने हैदराबाद सेंट्रल कॉलेज से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की है। एक होनहार वकील हैं। उनकी छवि अच्छी है । मृदाभाषी होने के साथ-साथ वह काफी स्मार्ट बॉय की तरह दिखते हैं ।विप्लव ने बताया कि पिछले 5 वर्षों से झारखंड हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करते हैं। पिता की तरह राजनीति में भी रुचि रखते हैं। फिलहाल सार्वजनिक तौर पर उन्होंने किसी राजनीतिक कार्य में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है और ना ही राजनीतिक मंच साझा किया है । निकट भविष्य में मौका मिलने पर उन्होंने राजनीति में प्रदार्पण करने की बात स्वीकारी भी। दुलाल भूईया ने बताया कि उनकी एक बेटी है जिसने लंदन से बीबीए पढ़ाई की है और एमबीए भी करेगी। कार्मेल स्कूल से प्लस टू की पढ़ाई करने के बाद वह दिल्ली में दिल्ली मैं रहकर पढ़ाई करने लगी। उसके बाद वह लंदन बीबीए की पढ़ाई करने चली गई। यह पूछने पर की क्या बेटी भी राजनीति में आ सकती है तो दुलाल भूईया ने स्वीकार किया की पिता ने राजनीति की है तो बेटी भी राजनीति कर सकती है । उन्होंने कहा की संभव है कि वे अपने बेटा और बेटी के साथ ही सम्मान देने वाली पार्टी में शामिल हो जाएं।

रघुवर दास पहुंचे दुलाल के घर,पूछा कुशलक्षेम, झारखंड आंदोलन में भूमिका को सराहा

दरअसल दुलाल भूईया इन दोनों सक्रिय राजनीति से अलग अलग पड़े हुए दिखाई देते हैं । दो दिन पहले राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता रघुवर दास दुलाल भूईया के घर पहुंचे जहां उन्होंने दुलाल भूईया को बड़े ही आदर और सम्मान के साथ गले लगाया। उनका हाल-चाल जाना और यह माना कि दुलाल भूईया गुरु जी के समक्ष वाले नेता हैं। रघुवर दास ओजपूर्ण भाव से दुलाल भूईया अभिभूत हो गए।
वे काफी संतुष्ट और उत्सुक होने के साथ-साथ खुश भी दिखाई दिए ।उन्होंने रघुवर दास की भूरि भूरि प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने मेरे आवास पर आकर मेरा हाल-चाल जाना। इससे मुझे आत्मिक संतुष्टि और शांति मिली।

रघुवर ने दिया मान-सम्मान : दुलाल भूइंया

निकट भविष्य में अगर रघुवर दास जी मान सम्मान के साथ पार्टी में शामिल करते हैं तो वे उनका प्रस्ताव जरूर स्वीकार करेंगे। दुलाल भूईया ने खुले मन से तो कुछ स्वीकार नहीं किया लेकिन इतना जरूर कहा कि पार्टी में अब पुराने कार्यकर्ताओं और आंदोलनकारियों को वह सम्मान नहीं मिल रहा है, जिसकी उम्मीद माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से थी। गुरु जी बीमार रहते हैं। वे सक्रिय राजनीति से काफी दूर हैं और बीमार रहते हैं। अब पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ही सारा काम देखते हैं। लेकिन जो उम्मीद उनसे थी वह पूरी नहीं हुई।

झारखंड आंदोलनकारी दुलाल दा के शरीर पर आज भी हैं पुलिस की लाठियों के निशान

उल्लेखनीय है कि दुलाल भूईया ने 80 और 90 के दशक में झारखंड आंदोलन का कोल्हान में बड़े जोर शोर से नेतृत्व किया। उनके आंदोलन ने तत्कालीन बिहार सरकार को झकझोर कर रख दिया और भारत सरकार को अलग झारखंड राज्य देने पर मजबूर होना पड़ा। दुलाल भूईया के शरीर में आज भी उन लाठियां का दर्द धधकता है जो उन्हें झारखंड आंदोलन के दौरान खायी थी। पैर घुटने और शरीर के अन्य भागों में भी उनके जख्मों के निशान हैं।

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One thought on “झामुमो में मान-सम्मान नहीं मिला तो पुत्र व पुत्री सहित भाजपा में शामिल होंगे दुलाल भूइंया

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