झारखंड नामधारी पार्टियों में एक्का स्थापित कर किंगकेमर की भूमिका निभाने को तैयार : सूर्य सिंह बेसरा
श्री दर्पण न्यूज, जमशेदपुर : झारखंड क्षेत्र विकास परिषद के गठन के विरोध में आज ही के दिन 12 अगस्त 1991 को आजसू के संस्थापक और घाटशिला के तत्कालीन विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने बिहार विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था. उन्होंने अपने इस्तीफे में कहा था कि झारखंड राज्य की स्थापना से कम पर समझौता नहीं करने वाले हैं. जबकि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू यादव ने विधानसभा में कहा था कि झारखंड उनकी लाश पर बनेगा. जिसका सूर्य सिंह बेसरा ने कड़ा विरोध किया था. अपने इस्तीफे के दिन व पुराने दिनों को याद करते हुये उन्होंने जमशेदपुर परिसदन में पत्रकारों से बातचीत की औऱ् अपनी मन की बात रखी.
झारखंडियों को आज तक उनका वाजिब हक नहीं मिल पाया
उन्होंने कहा की झारखंड अलग राज्य बन गया. आज उसकी स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने को है, लेकिन जिस सोच और उद्देश्यों को लेकर झारखंड का गठन हुआ वह आज तक पूरा नहीं हो सका है. ना तो सीएनटी,एसपीटी कानून को शख्ती से लागू किया गया. ना ही पैसा कानून लागू हुआ. स्थानीय लोगों को उनका वाजिब अधिकार नहीं मिला। स्थानीय युवाओं को रोजगार और नौकरी के लिए कोई नीति नहीं बनाई जा सकी. स्थानीय नीति आज तक नहीं बनी. स्थानीय लोगों को राज्य सरकार की नौकरियों में 75% आरक्षण दिया जाना जरूरी है. ऐसे में आज झारखंड नामित सभी दलों को एक होने की जरूरत है. चाहे वह झारखंड मुक्ति मोर्चा हो, आजसू हो झारखंड पीपुल्स पार्टी हो, जयराम महतो की जेकेएलएम हो सभी को एक होकर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की जरूरत है. 1929 के चुनाव को लेकर तैयार रहने की जरूरत है.
गुरुजी के सपनों को साकार करने का समय
उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि गुरु जी की कमी झारखंड में नहीं महसूस हो. वे अपने अनुभव और ज्ञान का पूरा उपयोग कर और जरूरत महसूस होने पर अपनी राय झारखंड सरकार को देने को तैयार हैं. तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अगर चाहे तो वे मेरे ज्ञान और अनुभव का लाभ ले सकते हैं. श्री बेसरा ने कहा कि वे एक वृहद झारखंड की मांग करते हैं. जिसमें उड़ीसा, बंगाल और बिहार के कुछ जिलों को मिलाकर एक वृहद झारखंड बनने के लिए आंदोलन करेंगे. हमेशा की तरह आज भी सूर्य सिंह बेसरा क्रांतिकारी तेवर में दिखे. उन्होंने कहा कि झारखंड को सजना सवरना हम सभी झारखंडियों की जवाब देही है. दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने झारखंड के विकसित, उन्नत और एक मजबूत सुदृढ़ झारखंड का जो सपना देखा था उसे पूरा किया जाना चाहिए. दलगत राजनीति से उपर उठकर, आदिवासी व मूलवासी के भेदभाव को भूलकर इसमें मिलकर सहयोग करना चाहिए. राजनीतिक विचारधारा को छोड़कर एक होने की जरूरत है.
लालू की नीतियों को बिहार विधानसभा में किया था विरोध
सूर्य सिंह बेसरा ने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा की 12 अगस्त 1991 को बिहार विधानसभा की सदस्यता से इसलिये त्यागपत्र कि राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने बिहार को तोड़कर झारखंड राज्य बनाने का पूरजोर विरोध किया और यहां तक कह दिया की झारखंड मेरी लाश पर बनेगा. ऐसे में उन्होंने ने तय किया कि विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर झारखंड के लिए आंदोलन की नई रूपरेखा तैयार करेंगे. आंदोलन को उग्र रुप दिया जायेगा. पूरे झारखंड में नाकेबंदी की जाएगी. उन्होंने कहा कि झारखंड के निर्माण और उसकी स्थापना में उन्होंनेअपने समर्थ और शक्ति से बढ़कर काम किया. यहां तक की झारखंड विकास परिषद के गठन की बात हुई तो उन्होंने शिबू सोरेन को इस वार्ता में शामिल करने के लिये भारत सरकार से अनुरोध किया था. लेकिन समय के साथ-साथ लोगों की विचारधाराओं में परिवर्तन हुआ और वे राजनीति के इस उठा पाठक में पीछे गए.
अपना अनुभव व ज्ञान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ साझा करने को तैयार
ठीक है कि उन्हें इस बात का कोई गम नहीं है. लेकिन गुरुजी के नहीं रहने पर वे फिर से झारखंड के नौ निर्माण, इसके विकास और प्रगति पथ पर आगे बढ़ने के रास्ते में तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पूरा-पूरा सहयोग करने को तैयार हैं. वे जब भी सलाह मशविरा और किसी तरह की जानकारी लेना चाहे तो वे उनके सहयोग के लिए हर हमेशा तत्पर रहेंगे. सूर्य सिंह बेसरा ने कहा कि उन्होंने झारखंड राज्य की स्थापना के लिए त्याग किया है. जब लोग विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने से डरते थे उसे समय उन्होंने इतना बड़ा त्याग किया और सदस्यता छोड़ दी.
