ताजा खबरें

दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में मनाया गया हथिनी रजनी का 16वां जन्मदिन, काटा गया 14 पाउंड का केक

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में हथिनी रजनी का 16वां जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से मनाया गया. रजनी का जन्मदिन मनाने के लिए दलमा वन आश्रयणी के कर्मचारियों के साथ ग्रामीण भी शामिल हुए.

बताते चलें कि सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी (Dalma Wildlife Sanctuary) में 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक वन्य प्राणी सप्ताह मनाया जाता है. इस अवसर पर हथिनी रजनी का सोलवा जन्मदिन मनाया गया. इस अवसर पर 14 पाउंड का केक भी काटा गया. हथिनी रजनी के जन्म उत्सव में स्कूली बच्चे, वन रक्षी और पदाधिकारी के साथ ग्रामीण भी शामिल हुए. दलमा पश्चिमी रेंजर दिनेश चंद्रा ने बताया कि ये खुशी की बात है. इससे लोगों में एक अच्छा संदेश जाता है कि जब हम अपने घर के बच्चों का जन्मदिन मना सकते हैं तो वन्यप्राणी का क्यों नहीं. यह कार्यक्रम इंसानों में पशुओं के प्रति प्रेम और भावनात्मक लगाव को दर्शाता है।

 

हथिनी रजनी का जन्मदिन मनाए जाने का मकसद 

दलमा वाइल्डलाइफ सैक्चुरियन के रेंज फॉरेस्ट ऑफसर दिनेश चंद्रा ने बताया कि रजनी के जन्मदिन पर लोगों को जंगली जानवरों के प्रति जागरूक करना भी मुख्य उद्देश्य है. रजनी के जन्मदिन को लेकर वन विभाग ये संदेश देना चाहता है कि जानवर भी पृथ्वी के लिए महत्वपूर्ण हैं और उनका भी अपना महत्व है. पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में इन जंगली पशुओं का भी अत्यंत महत्व है। इसी संदेश को ध्यान में रखकर वन्य प्राणियों का जन्मदिन मनाया जाता है. वन विभाग की कोशिश है कि इससे दूसरे भी सीख लें और जानवरों की सुरक्षा का संदेश देने के लिए इसे आत्मसात करें.

16 वर्ष पूर्व घायल अवस्था में दलमा क्षेत्र में मिली थी हथिनी रजनी

झुंड में रहने वाली मादा हथिनी रजनी 2009 में हाथियों की झुंड से बिछड़कर चांडिल के पास एक गड्ढे में फंसी मिली थी. घायल अवस्था में उसे निकालकर टाटा जू लाया गया था, जहां तीन माह तक टाटा जू के डॉक्टर एम पालित की देखरेख में रजनी का इलाज हुआ. स्वस्थ होने के बाद रजनी को दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी मकुला कोचा लाया गया. दलमा के मकुला कोचा चेक नाका में बकायदा इस हथिनी का नामकरण रजनी के रूप में किया गया. उसी समय से रजनी का जन्मदिन धूमधाम से मनाया जा रहा है. रजनी का जन्मदिन मनाने के लिए दलमा वन आश्रयणी के कर्मचारियों के साथ ही मकुला कोचा के ग्रामीण भी शामिल होते हैं।

Share This News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *