धर्मताजा खबरें

महादेवशाल को खाटू श्याम की जन्मस्थली के रूप में प्रस्तुत करती नई पुस्तक, प्रभात प्रकाशन से आई संदीप मुरारका की पुस्तक ‘हारे का सहारा: खाटू श्याम’

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर: शोधनिष्ठ लेखक संदीप मुरारका की नवीन पुस्तक ‘हारे का सहारा : खाटू श्याम’ प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्था प्रभात प्रकाशन से प्रकाशित हो चुकी है. यह कृति महाभारत के अमर योद्धा बर्बरीक (खाटू श्याम) की जन्मस्थली महादेवशाल (पश्चिमी सिंहभूम, झारखंड) को प्रमाणिक संदर्भों सहित प्रस्तुत करती है.

पांडवों की वन-यात्रा एवं भीम–हिडिंबा प्रसंगों की जड़ें झारखंड की धरती से गहराई से जुड़ी

प्राचीन ग्रंथों, स्थानीय लोककथाओं, पुरातात्त्विक संकेतों तथा पौराणिक यात्राओं के गहन अध्ययन के आधार पर लेखक ने यह स्थापित करने का प्रयास किया है कि पांडवों की वन-यात्रा एवं भीम–हिडिंबा प्रसंगों की जड़ें झारखंड की धरती से गहराई से जुड़ी हैं. पुस्तक में पांडव यात्रा मार्ग, झारखंड में महाभारतकालीन स्थल राजगनर में भीमखांदा, घाटशिला में पंच पांडव पहाड़, पलामू में भीम चूल्हा और महादेवशाल की ऐतिहासिक एवं पौराणिक गाथा, बर्बरीक के भाईयों की कहानी, ओड़िशा के सुंदरगढ़ में अवस्थित वेद व्यास से महादेवशाल की दूरी तथा ‘हारे का सहारा’ बनने की दिव्य प्रक्रिया को सजीव कथा शैली में प्रस्तुत किया गया है.

पुस्तक पाठकों को आध्यात्मिक गहराई के साथ 

धार्मिक आस्था, इतिहास, पर्यटन और लोकविश्वास—इन चारों के सशक्त संगम के रूप में यह पुस्तक पाठकों को आध्यात्मिक गहराई के साथ सांस्कृतिक गर्व का अनुभव कराती है.

संदीप मुरारका एक शोधनिष्ठ लेखक

संदीप मुरारका एक शोधनिष्ठ लेखक, सांस्कृतिक इतिहासकार और जनजातीय कथाओं के सशक्त संवाहक हैं. शिखर को छूते ट्राइबल्स, देश के 105 विशिष्ट जनजातीय व्यक्तित्व, पीपल्स पद्मा तथा मेरी माटी मेरा देश जैसी कृतियाँ उनकी इसी विशिष्ट दृष्टि का प्रमाण हैं, जिनके माध्यम से वे भूले-बिसरे नायकों पर शोध के नए मार्ग प्रशस्त करते हैं.

खाटू श्याम की जन्मस्थली पर शोध 

खाटू श्याम की जन्मस्थली महादेवशाल पर केंद्रित उनका यह शोध तथा पांडव यात्रा मार्ग की स्पष्ट व्याख्या साहित्य, इतिहास और सांस्कृतिक अध्ययन—तीनों क्षेत्रों में एक महत्त्वपूर्ण योगदान के रूप में देखा जा रहा है. यह पुस्तक अमेज़न, फ्लिपकार्ट तथा प्रभात प्रकाशन की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है.

Share This News