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बागबेड़ा कॉलोनी का सड़क निर्माण कार्य : करोड़ों की लागत, पर भ्रष्टाचार की कालिख, ‘धूल’ फांकती सरकारी सड़क, बरसात का पहला चरण भी शायद ना झेल पाए 

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर: बागबेड़ा हाउसिंग कॉलोनी में मुख्यमंत्री सड़क निर्माण योजना के तहत बन रही सड़क के लिए आवंटित धनराशि पर भ्रष्टाचार का साया मंडरा रहा है। स्थानीय स्तर पर हो रहे विरोध की वजह से सड़क निर्माण का कार्य विवादों के घेरे में है। ₹2.84 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बन रही सड़कें जन-सुविधा के बजाय भ्रष्टाचार का नमूना पेश कर रही हैं। स्थानीय निवासियों ने निर्माण की गुणवत्ता पर तो सवाल खड़ा किया ही है साथ ही इसे अति घटिया’ बताते हुए काम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

नियमों की उड़ाई जा रही धज्जियां

सड़क के निर्माण कार्य में एक ओर जहाँ नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गईं हैं वहीं पुराने पर नया का लेप चढ़ा दिया गया है । इस तरह करोड़ों रुपए बचाकर इस सरकारी योजना के रकम की बंदर बांट की गई है। उल्लेखनीय है कि करोड़ों के इस भारी भरकम बजट में बागबेड़ा कॉलोनी के रोड नंबर 1 और रोड नंबर 4 की मुख्य सड़कों के अलावे क्रॉस रोड का भी निर्माण कंक्रीट से किया जाना है।

विरोध के कारण एक तरफ का निर्माण कार्य रुका 

रोड नंबर 1 (रामनगर से दुबे दुकान तक) में पुरानी कंक्रीट वाली जर्जर और ध्वस्त सड़क को बिना हटाए ही उसके ऊपर नया मसाला डाला जा रहा था। जनता के भारी विरोध के बाद इस हिस्से का काम फिलहाल रुका हुआ है। शेष हिस्से पर कंक्रीट का लेप चढ़ाया जा रहा है। इस क्षेत्र के लोग भले ही इस कार्य का विरोध जाने अनजाने में ना कर रहे हो, लेकिन भ्रष्टाचार का असर साफ तौर पर देखा जा सकता है। कहीं कहीं तो किनारे की सड़क अपना जगह भी छोड़ चुकी है। समय रहते अगर विभाग द्वारा सड़क निर्माण की निगरानी नहीं की गई तो निश्चित रूप से यह विकास लोगों के लिए परेशानी का सबब बनेगा।

सीमेंट के साथ गिट्टी का डस्ट मिलकर चल रहा निर्माण कार्य

प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण कार्य में प्रयुक्त सीमेंट मिलावटी है। सीमेंट में गिट्टी के डस्ट को मिलाकर ढलाई का काम किया जा रहा है, जिसकी वजह से अपने निर्माण के पहले चरण में ही सड़कों पर धूल उड़ने लगे हैं। सड़क पर पुआल और पानी डालकर इस धूल को उड़ने से रोकने की कोशिश की गई है, लेकिन लोगों ने जब पुआल को साफ किया और सड़क थोड़ी सुखी उसके बाद सड़क पर डस्ट उड़ाना शुरू हो गया। स्पष्ट तौर पर ऐसा लगता है कि सड़क निर्माण में गिट्टी से निकलने वाले डस्ट का इस्तेमाल सीमेंट में मिलकर किया गया है। आलम यह है कि सड़क पूरी तरह बनी भी नहीं और अभी से धूल उड़ने लगी है।

गुमराह करने के लिए सड़क के एक छोर की पोकलेन से खुदाई

जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग को गुमराह करने के लिए सड़क के एक किनारे पोकलेन से खुदाई की गई है, ताकि कागजों पर यह दिखाया जा सके कि पुरानी सड़क उखाड़कर नई बनाई जा रही है। इस तरह ठेकेदार द्वारा आंख में धूल झोंकने का काम किया गया है।

नकली सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत 

स्थानीय लोगों ने घटिया और मिलावटी सीमेंट के इस्तेमाल की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार द्वारा सरकारी राशि के गबन, बंदरबाँट और मिलीभगत का भी आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना का ठेका ‘झुना सिंह’ नामक ठेकेदार के पास है। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि सरकारी बजट को बचाने और आपस में बांटने के लिए गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि ठेकेदार ने कुछ प्रभावशाली लोगों को ‘चुप’ रहने के लिए उपकृत भी किया है।

गौरतलब है कि पूर्व में विधायक संजीव सरदार और सांसद विद्युत वरण महतो के समर्थकों ने काम रुकवाया था, लेकिन दोबारा शुरू होने पर धांधली और बढ़ गई है। सामाजिक कार्यकर्ता विनोद कुमार, विनोद राम, पवित्र पांडे और विनय ओझा ने इस संबंध में उपायुक्त (DC) को लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है।

जनता की चेतावनी

यदि प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई, तो जनता के टैक्स के करोड़ों रुपयों की लूट इसी तरह जारी रहेगी। यह सड़क कुछ ही दिनों में टूट जाएगी और लोगों की परेशानियां कम होने के बजाय बढ़ जाएंगी।

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