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तुरामडीह में उमड़ा ‘जोहार संवाद’ और सांस्कृतिक एकता का सैलाब

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : यूसील तुरामडीह क्लब हाउस में ‘जोहार ट्रस्ट’ द्वारा आयोजित ‘जोहार संवाद’ कार्यक्रम में आदिवासी अस्मिता, कला और संस्कृति के संरक्षण का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के प्रतिनिधियों ने शिरकत की।

संस्कृति और शिक्षा ही प्रगति का आधार

विनय पूर्ति (पत्रकार) ने कहा कि आदिवासी दर्शन, भाषा और लिपि के प्रति गौरव की भावना जागृत करना और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।”

पिंटू चकिया (अध्यक्ष, जोहार ट्रस्ट) ने कहा कि “आदिवासी परंपराओं को वैश्विक पहचान दिलाना और युवाओं को हर क्षेत्र में नेतृत्व के लिए तैयार करना अनिवार्य है।”

ब्लास्टर केराई व अन्य वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा और खेलकूद को प्राथमिकता देने, ‘हो’ भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने और ‘वारंग क्षिती’ लिपि के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया।

प्रतिभाओं का सम्मान

समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 11 विभूतियों को ‘जोहार संस्था’ द्वारा सम्मानित किया गया, जिनमें गालाय फुर्ती, राजू बन्धु पाडेया, रायमुनी बुढ़ीउली और संजय अल्डा जैसे नाम प्रमुख रहे।

आगामी आकर्षण: 12 अप्रैल का ‘महा-उत्सव’

कल आयोजित होने वाला ‘राष्ट्रीय मागे महोत्सव’ आकर्षण का केंद्र होगा, जिसकी मुख्य विशेषताएं

मागे सूसून प्रतियोगिता: 11 राज्यों के नृत्य दल हिस्सा लेंगे। कुल पुरस्कार राशि ₹2,11,000।

ग्रैंड फिनाले (डांस चैलेंज): देश के टॉप 15 डांसर्स देंगे प्रस्तुति। जज: स्नेहा चक्रवर्ती (विजेता, डांस प्लस-6)। पुरस्कार राशि: ₹1,00,000।

विशिष्ट अतिथि: पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, अर्जुन मुंडा, मधु कोड़ा सहित कई विधायक और सांसद गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम: बॉलीवुड और क्षेत्रीय फिल्मी कलाकारों द्वारा रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

विक्रम का उद्देश्य उद्देश्य

आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, पारंपरिक कलाओं का संवर्धन और विभिन्न समुदायों के बीच अटूट मैत्री संबंध स्थापित करना।

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