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आदिवासियों की जल,जंगल, जमीन खतरे में, संथाल की पावन धरती से अपने आंदोलन की 23 मार्च से शुरुवात करेंगे पूर्व मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन

श्री दर्पण न्यूज, जमशेदपुर : बाहा पर्व के मौके पर अपने पैतृक गांव झिलिंगगोड़ा में पत्रकारों से बातचीत करते हुये पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आदिवासी समाज की मान्यताये और परम्परा खतरे में है. हमारा जल, जंगल जमीन भी खतरे में हैं. गैर कानूनी तरीके अपना कर आदिवासियों की जमीन हड़पी जा रही है. लेकिन बताना चाहते हैं कि हम चूप बैठने वाले नहीं हैं. मुझे वोट की राजनीति नहीं करनी है. हमे आदिवासियों के अस्तित्व को बचाना है. इसके लिये हम लड़ाई लड़ेंगे. सड़क पर उतर कर आंदोलन करेंगे. हमने हमेशा से गरीब-गुरबा, पिछड़े-दलित और आदिवासियों के हक की लड़ाई लड़ी है, जो आगे भी जारी रहेगी. बांग्लादेशी घुसपैठ और धर्मांतरण के मुद्दे पर कहा कि आगामी 23 मार्च (शहीद दिवस) से वे संथाल की पावन धरती से आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिये उलगुलान (आंदोलन) करने जा रहे हैं.

आदिवासी समाज को धर्मांतरण कराने वालों से खतरा

पूर्व सीएम ने  हमेशा की तरह आज भी अपने आक्रामक आवाज में आरोप लगाया कि झारखंड के आदिवासियों को बांग्लादेशी घुसपैठिए और धर्मांतरण कराने वाले लोगों से खतरा है. वे लोग आदिवासियों के वजूद को मिटाना चाहते हैं. हम चूप नहीं बैठने वाले हैं. इसे रोकने के लिए वे आंदोलन शुरु करने जा रहे हैं. उन्होंने अपने मुख्यमंत्रीत्व काल (जिसे वे इंटरवेल का समय कहते हैं) में  झारखंड के सभी पवित्र धार्मिक स्थलों, जाहेरथान और जाहेरगढ़ को एक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी. लेकिन मुख्यमंत्री पद से हट जाने की वजह से वे उसे पूरा नहीं कर पाये हैं. आज ये स्थल प्राकृतिक सौंदर्यता से पूर्ण होने के बावजूद सरकारी अनदेखी के शिकार हैं.

आदिवासी समाज को एक होने का आहवान

श्री सोरेन ने अपने हक और अधिकार के लिये आदिवासी समाज को एक होने का आहवान किया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड, बिहार, बंगाल, ओडिसा, आसाम चाहे देश व दूनिया के कोने-कोने में बसे आदिवासी समाज की बात हो, हमे एक होकर अपने हक व अधिकार की लड़ाई लड़नी होगी. घुसपैठियों के बहकावे में आकर अपनी परम्परा व संस्कृति को खो देंगे. इससे बचना है. उन्होंने कहा कि हमें अपनी धार्मिक पहचान को मजबूत करना है. आदिवासियों का इतिहास, परम्परा, जीवनशैली और संस्कृति गौरवशाली परम्परा की प्रतिक रही है.

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One thought on “आदिवासियों की जल,जंगल, जमीन खतरे में, संथाल की पावन धरती से अपने आंदोलन की 23 मार्च से शुरुवात करेंगे पूर्व मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन

  • I don’t think the title of your article matches the content lol. Just kidding, mainly because I had some doubts after reading the article.

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