ताजा खबरें

सुरों के सरताज संजीव बनर्जी ने संतों की सेवा में समर्पित की मकर संक्रांति: भक्ति और संगीत का अनूठा संगम

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : जमशेदपुर की मिट्टी से निकलकर अंतर्राज्यीय मंचों पर अपनी गायकी का लोहा मनवाने वाले प्रसिद्ध गायक संजीव बनर्जी ‘टुबई’ ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर अपनी आस्था और सेवा भाव का परिचय दिया। ‘किशोर कुमार’ की सुरीली विरासत को अपनी आवाज़ में संजोने वाले टुबई ने साकची स्थित मनोकामना मंदिर में सपरिवार माथा टेका और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।

हुनर और आस्था का मेल

शास्त्रीय संगीत से लेकर डिस्को और भजनों तक में महारत रखने वाले टुबई शहर के संगीत प्रेमियों के बीच केवल एक कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि एक गहरी धार्मिक निष्ठा वाले व्यक्तित्व के रूप में भी जाने जाते हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि सुरों के प्रति उनका समर्पण जितना गहरा है, ईश्वर और मानवता के प्रति उनकी आस्था भी उतनी ही अटूट है।

मानवता की सेवा ही ईश्वर की पूजा

मकर संक्रांति के शुभ दिन पर मंदिर पहुँचे संजीव बनर्जी ने न केवल पूजा-अर्चना की, बल्कि वहाँ उपस्थित साधु-संतों के सानिध्य में समय बिताया। इस दौरान उन्होंने सेवा की एक मिसाल पेश करते हुए अस्वस्थ संतों के बीच दवाइयों का वितरण किया। कड़ाके की ठंड को देखते हुए ज़रूरतमंदों को कंबल भेंट किए। इस दौरान अपनी जादुई आवाज़ के कुछ अंश सुनाकर संतों का मन मोह लिया।

दार्शनिक अंदाज में भाषा की अभिव्यक्ति

दुबई ने बातचीत के दौरान बड़े ही दार्शनिक अंदाज में शब्दकोश की गहराइयों को प्रकल्पित कर कहा “संतों के हृदय में ईश्वर का वास होता है। पूर्ण विश्वास और सच्ची श्रद्धा के साथ संतों की सेवा करने से न केवल मानसिक शांति मिलती है, बल्कि परमात्मा का सानिध्य भी प्राप्त होता है।” संतों ने भी टुबई के इस सेवा भाव से प्रसन्न होकर उन्हें उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु होने का मंगल आशीर्वाद दिया। संगीत की दुनिया का यह चमकता सितारा आज अपनी विनम्रता और सेवा भाव के कारण चर्चा के केंद्र में है।

Share This News