विधानसभा में संजीव सरदार की माँग – प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को शामिल किया जाए
श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : झारखंड विधानसभा में गुरुवार को पोटका विधायक संजीव सरदार ने भूमिज जनजाति समुदाय के अत्यंत संवेदनशील मुद्दे को जोरदार तरीके से सदन में उठाते हुए JTET, JSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को पुनः शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भूमिज समुदाय की जनसंख्या चार लाख से अधिक है और यह झारखंड के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम तथा सरायकेला-खरसावां जिले में प्रमुख रूप से निवास करते हैं।
2023 में संशोधित कर भूमिज भाषा को प्रतियोगी परीक्षाओं से हटाया गया
विधायक ने सदन को बताया कि पूर्व की परीक्षाओं—जैसे टेट 2016, परीक्षा 2014, कक्षपाल परीक्षा 2015 में भूमिज भाषा शामिल थी और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भूमिज भाषा में परीक्षा देकर नियुक्तियाँ प्राप्त की थीं। लेकिन 2023 में जारी संशोधित नियमावलियों में भूमिज भाषा को सूची से विलोपित कर दिया गया, जिससे भूमिज समुदाय में गहरा असंतोष है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 350(A) में प्रदत्त स्थानीय जनजातीय भाषाई अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। इसलिए उन्होंने सदन के माध्यम से मांग रखी कि आगामी 10th JTET, JSSC की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में भूमिज भाषा को पुनः शामिल किया जाए।
मंत्री दीपक बिरुआ का जवाब: “सरकार इस मामले में गंभीर है और विचार करेगी”
सदन में जवाब देते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि लगभग 5 लाख लोग भूमिज समाज से आते हैं और पहले की परीक्षाओं में भूमिज भाषा शामिल थी। परंतु बाद में नियमावली में बदलाव के दौरान यह भाषा सूची से हट गई।
मंत्री ने बताया कि राज्य में सिविल सेवा की तर्ज पर परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए 2012 में विशेषज्ञ समिति बनी थी और उसके अनुरूप कई भाषाओं को सम्मिलित किया गया था। इसके बाद फिर परीक्षाओं में भाषा को ले कर विधानसभा की एक समिति बनी थी, लेकिन उस समय भी भूमिज भाषा शामिल नहीं की गई।
मंत्री के जवाब के बाद विधायक संजीव सरदार दोबारा खड़े हुए और कहा—
यदि आदिवासियों की सरकार में ही आदिवासी भाषा का संरक्षण नहीं हुआ, तो समाज खत्म हो जाएगा। भूमिज भाषा सूची से हटेगी तो आने वाली पीढ़ियाँ प्रतियोगी परीक्षाओं से वंचित हो जाएँगी।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि भूमिज भाषा को परीक्षा सूची में शामिल करना सिर्फ भाषा का नहीं, अस्तित्व, पहचान और सामाजिक सम्मान का मामला है।
विधायक के आग्रह के बाद मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा की निश्चित ही यह मामला जनजातीय समुदाय और उसकी भाषा से जुड़ा है। सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार करेगी।
