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गरीबों के ‘मसीहा’ बने पूर्व सिविल सर्जन डॉ. ए.के. लाल: पद छूटा पर सेवा का संकल्प नहीं

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर: झारखंड के चिकित्सा जगत में एक ऐसा नाम, जो किसी परिचय का मोहताज नहीं है—डॉ. अरविंद कुमार लाल (डॉ. ए.के. लाल)। जमशेदपुर समेत कई जिलों में सिविल सर्जन जैसे उच्च पदों पर आसीन रहने के बाद भी, उनकी पहचान एक पद से कहीं बड़ी है। वे आज उन हजारों असहायों के लिए उम्मीद की किरण हैं, जिनके लिए स्वास्थ्य सेवाएँ एक सपना होती हैं।

डॉ लाल से मिलने का माध्यम बने गायक टुबई

शहर के जाने-माने गायक और किशोर कुमार की आवाज में सुरों का सरगम बरसाने वाले संजीव बनर्जी उर्फ टुबई के माध्यम से डॉक्टर लाल से मिलने का एक सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ।टुबई भी डॉक्टर लाल के बहुत बड़े प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने बताया की समय और मौके पर डॉक्टर लाल जाने- अनजाने लोगों की भी मदद करने वाले है। सामाजिक सरोकारों से उनका बड़ा नाता रहा है। मरीज की बातें गंभीरता से सुनना और उसे उचित सलाह देना डॉक्टर लाल के व्यक्तित्व की बड़ी खासियत है।

समाज में हर वर्ग के लोगों खासकर जरूरतमंदों के साथ सहयोगात्मक भूमिका निभाने वाले टुबई भी एक सुलझे और प्रखर व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने भी अपनी अभिव्यक्ति में डॉक्टर लाल की भूरि भूरि प्रशंसा की।

“पैसा नहीं, सेवा भाव से मिलता है असली सुकून”

डॉ. लाल का मानना है कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि ईश्वरीय सेवा है। अपने शानदार करियर में उन्होंने कभी धन को कर्तव्य से ऊपर नहीं रखा। चाहे टीबी, मलेरिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों का दौर हो या कोरोना महामारी की विभीषिका, डॉ. लाल ने अपनी जान की परवाह किए बिना सैकड़ों लोगों को मौत के मुँह से बाहर निकाला और उन्हें नई जिंदगी दी।

आज जमशेदपुर के पोटका (हाता) क्षेत्र में एक 10 बेड का निजी क्लिनिक चलाने के बावजूद, उनका लक्ष्य मुनाफा कमाना नहीं है। यहाँ वे बुजुर्गों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों की सेवा में दिन-रात जुटे रहते हैं।

सरकारी ढांचे पर बेबाक राय: “सिर्फ इमारतें खड़ी करने से इलाज नहीं होता”

राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर चर्चा करते हुए डॉ. लाल ने अपनी बात बड़ी बेबाकी से रखी। उन्होंने कहा कि आज ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति अत्यंत दयनीय है।

“राज्य में स्वास्थ्य के नाम पर केवल ‘सिविल वर्क’ (निर्माण कार्य) हो रहे हैं। बड़ी-बड़ी इमारतें तो खड़ी कर दी गई हैं, लेकिन उनमें न डॉक्टर हैं, न दवा और न ही पैरामेडिकल स्टाफ। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण जनता आज भी बेहतर इलाज के लिए तरस रही है।”

30 वर्षों का अनुभव और ‘निशुल्क’ इलाज का संकल्प

डॉ. लाल ने अपने जीवन के 30 साल ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा में समर्पित किए हैं। वे प्रखंड स्तर की चुनौतियों को बारीकी से समझते हैं। आज भी उनके क्लिनिक के दरवाजे हर उस व्यक्ति के लिए खुले हैं जिसके पास पैसे नहीं हैं।

गरीबों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए मुफ्त सेवा: डॉ. लाल असहायों और बुजुर्गों से फीस नहीं लेते।

ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मान: वे समाज के इस उपेक्षित वर्ग का भी निशुल्क उपचार करते हैं

आत्मिक संतुष्टि: डॉ. लाल कहते हैं, “ईश्वर की कृपा से मेरे पास सब कुछ है। जब मैं किसी गरीब का मुफ्त इलाज करता हूँ, तो जो आत्मिक खुशी मिलती है, उसका कोई मोल नहीं है।”

संघर्ष और सत्य की जीत

सफलता के साथ चुनौतियां भी आईं। सेवा के अंतिम पड़ाव पर कुछ लोगों ने उन्हें साजिश के तहत परेशान करने की कोशिश की, जिससे उन्हें हाई कोर्ट तक जाना पड़ा। लेकिन कहते हैं न कि ‘साँच को आँच नहीं’, डॉ. लाल निर्दोष साबित हुए। इस कठिन दौर में उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रोत्साहन ने डॉ. लाल के आत्मबल को टूटने नहीं दिया।

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