संध्या सिंह के नहले पर सुधा गुप्ता दहला, संध्या सिंह पहुंची अदालत, सुधा गुप्ता ने कहा न्यायालय पर पूरा भरोसा, मानगो की जनता को गुमराह न करें संध्या सिंह : सुधा गुप्ता
श्री दर्पण न्यूज़ जमशेदपुर : मानगो नगर निगम के चुनाव में मेयर पद की प्रत्याशी रही संध्या सिंह ने मेयर चुनी गई सुधा गुप्ता के चुनाव को न्यायालय में चुनौती दी है। संध्या सिंह के अधिवक्ता के एम सिंह द्वारा दाखिल मुकदमे में मुंशीफ कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए प्रतिवादी सुधा गुप्ता, रिटर्निंग ऑफिसर मानगो नगर पालिका, चुनाव उपयुक्त पूर्वी सिंहभूम जिला निर्वाचन पदाधिकारी एवं राज्य निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी कर 15 मई 2026 को कोर्ट में हाजिर होने का सम्मन जारी किया है। इस संबंध में एक प्रेस वार्ता का आयोजन कर संध्या सिंह के अधिवक्ता द्वारा पत्रकारों को इस संबंध में जानकारी दी गई। प्रेस वार्ता में संध्या सिंह, भाजपा नेता और संध्या सिंह के पति नीरज सिंह भी उपस्थित थे।
संध्या सिंह द्वारा जारी किया गया प्रेस रिलीज कुछ इस प्रकार है-

” मैं संध्या सिंह, पति श्री नीरज सिंह, पता डी006. कन्दगिरी, आशियाना एन्क्लेव, डिमना, मानगो जमशेदपुर, जिला- पूर्वी सिंहभूम की निवासी मानगो नगर निगम क्षेत्र की एक जागरूक मतदाता होने के नाते, यह सूचित करना चाहती हूँ कि मैंने माननीय व्यवहार न्यायालय, कनिष्ट कोटि जमशेदपुर के समक्ष एक निर्वाचन याचिका स. 33/2026 दायर की है, जिसमें मानगो नगर निगम, 2026 के मेयर पद के चुनाव परिणाम 27 फरवरी 2026 को चुनौती दी गई है।
दायर की गई याचिका का मूल
यह याचिका झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 580 एवं 582 के अंतर्गत दायर की गई है। याचिका में यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि निर्वाचित प्रत्याशी सुधा गुप्ता ने चुनाव लड़ने की पात्रता प्राप्त करने के लिए अपने निवास संबंधी तथ्यों में गंभीर अनियमितताएं की है।
मेरे संज्ञान में यह तथ्य आया है कि निर्वाचित प्रत्याशी पूर्व में कदमा क्षेत्र की मतदाता थीं और नगर निगम चुनाव से ठीक पहले उनका नाम संदिग्ध परिस्थितियों में मानगो क्षेत्र की मतदाता सूची में जोड़ा गया। जबकि वास्तविकता यह है कि उनके निवास में कोई वास्तविक परिवर्तन नहीं हुआ। जिससे यह प्रतीत होता है कि यह परिवर्तन केवल चुनाव लड़ने की पात्रता प्राप्त करने हेतु किया गया।
मतदाता सूची में नाम जोड़ा गया
मैंने अपनी याचिका में यह भी उल्लेख किया है कि मतदाता सूची में नामांतरण कृत्रिम एवं योजनाबद्ध तरीके से किया गया। संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नामांकन की उचित जांच नहीं की गई तथा यह संपूर्ण प्रक्रिया निर्वाचन प्रणाली के साथ छल के समान है.
उल्लेखनीय है की उक्त वाद दायर करने के पूर्व मेरे अधिवक्ता के. एम. सिंह द्वारा रिटर्निंग ऑफिसर, मानगो नगरपालिका चुनाव, 2026, उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर एवं राज्य निर्वाचन आयोग, झारखंड को लिखित शिकायत की गयी थी, जहा राज्य निर्वाचन आयोग, झारखंड के द्वारा पत्रांक स. 934 दिनांक 30 मार्च 2026 के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया की झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 की धारा 580 में विहित प्रावधान के अंतगर्त सक्षम न्यायालय के समक्ष निर्वाचन अर्जी याचिका के तहत अपील किया जा सकता है, जिसे स्वीकृत कर माननीय न्यायालय द्वारा सभी प्रतिवादियों को उपस्थित हो कर लिखित पक्ष रखने हेतु 15 मई 2026 की तिथि निर्धारित की गयी है.
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला है। यदि पात्रता की शर्तों को इस प्रकार दरकिनार किया जाता है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि जनता के विश्वास के साथ भी विश्वासघात है।
न्यायालय में दाखिल किये गये मामले में जिन बिंदुओं को चिन्हित किया गया है उनमें
1. निर्वाचित प्रत्याशी के चुनाव को शून्य एवं अवैध घोषित किया जाए,
2. दिनांक 27 फरवरी 2026 के चुनाव परिणाम को निरस्त किया जाए,
3. इस मामले में विस्तृत जांच कराई जाए,
4. न्यायहित में आवश्यक अन्य आदेश पारित किए जाएं।
मैं यह स्पष्ट करना चाहती हूँ कि मेरा उद्देश्य केवल सत्य को सामने लाना एवं लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुचिता को बनाए रखना है। मुझे न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है कि इस मामले में निष्पक्ष एवं उचित निर्णय लिया जाएगा।
प्रेस वार्ता के अनुत्तरित सवाल :
अगर सुधा गुप्ता के नामांकन पत्र में खामियां थी तो उसे उसी समय रद्द क्यों नहीं किया गया?
क्या सुधा गुप्ता का आवास मानगो के अलावा शहर के कदमा और अन्य क्षेत्र में नहीं हो सकता है ?
वोटर लिस्ट में सुधा गुप्ता की तस्वीर की जगह किसी दूसरे की तस्वीर होने का दवा : सुधा गुप्ता की तस्वीर की साइंटिफिक जांच हुई है क्या? अगर उनकी तस्वीर नहीं है तो क्या यह निर्वाचन कार्यालय की मानवीय भूल हो सकती है ?
सुधा गुप्ता मानगो में न रहकर कदम में रहती हैं इसकी क्या प्रमाणिकता है? मान लिया जाए कि वह कदम में ही रह रही हैं तो क्या यह गैरकानूनी है?
सुधा गुप्ता का पक्ष
वहीं दूसरी ओर मानगो की मेयर सुधा गुप्ता की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उनका पक्ष रखा गया है। जिसमें लगाए गए सभी आरोपी को बेबुनियाद, तर्कहीन और निराधार बताया गया है। यह भी कहा गया है कि मेयर के चुनाव में बुरी तरह से हारने के बाद संध्या सिंह बिना सर पांव के मुद्दे उठाकर जनता को गुमराह करना चाहती हैं। लेकिन मानगो की जनता उनके इस बयानबाजी से भ्रमित होने वाली नहीं है। अगर मामला कोर्ट में विचाराधीन है तो उसमें विशेष बोलने की जरूरत नहीं है। न्यायालय उचित न्याय करेगा। न्यायालय पर मुझे पूरा भरोसा है। सुधा गुप्ता की ओर से जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति को हुबहू प्रस्तुत कर रहा हूं।
मानगो नगर निगम चुनाव से संबंधित कुछ आरोप पूर्व प्रत्याशी श्रीमती संध्या सिंह द्वारा लगाए गए हैं, जो पूरी तरह से बेबुनियाद, तर्कहीन एवं भ्रामक हैं।
यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि श्रीमती सुधा गुप्ता जी ने अपना चुनाव पूर्ण पारदर्शिता, वैधानिक प्रक्रिया और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप लड़ा है।
उनके सभी दस्तावेज, नामांकन और चुनावी प्रक्रिया संबंधित नियमों के तहत विधिवत जांच के बाद ही स्वीकार किए गए हैं।
प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा
जहां तक मतदाता सूची अथवा निवास से जुड़े मुद्दों की बात है, यह पूरी तरह प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है, जिसमें संबंधित विभाग और निर्वाचन आयोग की भूमिका होती है। इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता का आरोप निराधार और तथ्यहीन है।
यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है। हमें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है और हम न्यायालय के हर निर्णय का सम्मान करेंगे।
लोकतंत्र में हार जीत स्वाभाविक प्रक्रिया
लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक है, लेकिन जनता के जनादेश को स्वीकार करना और विकास के कार्यों में सहयोग देना सभी की जिम्मेदारी है।
दुर्भाग्यवश, निराधार आरोप लगाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
मैं जमशेदपुर की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूँ कि सुधा गुप्ता जी का एकमात्र लक्ष्य क्षेत्र का विकास, पारदर्शी प्रशासन और जनसेवा है और वे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती रहेंगी।
मतदाता पहचान पत्र पूरी तरह वैद्य
उनका मतदाता पहचान पत्र पूरी तरह वैध प्रक्रिया के तहत भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार बना है। यदि किसी को इस पर आपत्ति है, तो उचित मंच निर्वाचन आयोग है, न कि मीडिया के माध्यम से भ्रम फैलाना। बिना प्रमाण के ऐसे आरोप लगाना कानूनन मानहानि की श्रेणी में आता है।
जन समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य कर रही हैं सुधा गुप्ता
कार्यभार संभालने के बाद ही मेयर सुधा गुप्ता जी निरंतर मानगो क्षेत्र में जनसमस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय रही हैं। विभिन्न वार्डों का निरीक्षण, जल, सड़क एवं नाली जैसी समस्याओं के समाधान हेतु अधिकारियों को निर्देश देना—ये सभी कार्य सार्वजनिक रूप से प्रमाणित हैं।
तथ्यहीन आरोप लगाना मानहानि के दायरे में
बिना तथ्य एवं प्रमाण के इस प्रकार के झूठे और मानहानिकारक आरोप लगाने पर विधि सम्मत कार्रवाई (Defamation Proceedings) करने का अधिकार सुरक्षित हैं और इस प्रकार के भ्रामक बयान के बाद संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
सुधा गुप्ता का फोकस मानगो की जनता की सेवा
मेयर सुधा गुप्ता जी का फोकस केवल और केवल मानगो की जनता की सेवा, विकास कार्यों की गति बढ़ाने और एक पारदर्शी प्रशासन देने पर है।
कुछ लोग मानगो में होते विकास कार्य से घबरा कर ओछी राजनीति कर रहे हैं जिसको जनता समझ रही हैं, जिन समस्याओं से मानगो की जनता परेशान और हताश थी उन समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से समाधान मेयर सुधा गुप्ता कर रही हैं, ऐसे झूठे आरोपों से वे डरने और घबराने वाली नहीं हैं,जनता की अदालत ने उन्हें चुन लिया हैं हमें यकीन हैं न्यायालय में ये आरोप नहीं टिकेगा और सत्य की जीत होगी, सत्य परेशान हो सकता हैं, पराजित नहीं, सत्यमेव जयते।
खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे वाली कहावत चरितार्थ करने वाली संध्या सिंह जी से सवाल :-
1)क्या ये सच नहीं की आपका ससुराल चाईबासा में था बाद में आप और आपके पति मानगो में आकर बस गए, क्या ये चुनाव लड़ने का मंशा नहीं थी?
2)क्या ये सच हैं कि पूरे चुनाव में नशाखोरी की बात करने वाले आपके पति का व्यवसाय शराब परोसने का नहीं हैं?जब आप अपने होटल और पब में शराब बेचते हैं तो नशा खत्म करने की बात करना जनता को गुमराह करने का नहीं हैं?
3)क्या आप बारीडीह में रहती थी?
4)चुनाव के दौरान भाजपा नेता ने पार्टी समर्थन के लिए महंगे गिफ्ट और पैसे और गाड़ी देने का आरोप लगाया था वो सही था?
