प्रशासन के आदेश को ठेंगा दिखाते हुये निर्माण कार्य जारी, आखिर किसके आदेश पर चल रहा है काम? कानून को आईना क्यों दिखा रहे राजेश सोनकर और आकाश सोनकर, बागबेड़ा में रेलवे की जमीन को लेकर विवाद
श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले के बागबेड़ा क्षेत्र में रेलवे की जमीन पर बने घर को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। मामले में पप्पु सोनकर ने आरोप लगाया है कि 28 अक्टूबर 2026 को दीपावली के अवसर पर जब वह अपने घर की साफ-सफाई करने पहुंचे, तो राजेश सोनकर और आकाश सोनकर के साथ विवाद हुआ। पप्पु सोनकर के अनुसार, इस दौरान उनके और उनकी पत्नी के साथ मारपीट भी की गई। निर्लजता की सारी हदें पार कर महिला को बुरी तरह से पीटा गया। इसके बाद मामला बागबेड़ा थाना पहुंचा।
बागबेड़ा थाना पहुंचा मामला, प्रशासन ने रुकवाया काम
जमीन और मकान को लेकर इस बढ़ते विवाद ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। थाना प्रभारी बागबेड़ा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए काम रोकवा दिया। कहा गया कि घर रेलवे की जमीन पर बना है और मामले में फैसला होने तक वहां काम नहीं किया जा सकता। लेकिन राजेश सोनकर और आकाश सोनकर दबंगई दिखाते हुए आज काम फिर से शुरू करवा दिया है। प्रशासन के आदेश की अनदेखी कर दोनों व्यक्ति कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
वहीं पप्पु सोनकर ने प्रशासन के निर्देशों को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में प्रशासन का जो भी फैसला होगा, वह उसे स्वीकार करेंगे।
कल हुई मारपीट की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई हो
पप्पु सोनकर का कहना है कि पक्ष कि 30 अक्टूबर 2026 को राजेश सोनकर और आकाश सोनकर उसी स्थान पर काम करवा रहे हैं। जबकि प्रशासन द्वारा काम बंद करवाया गया था।
यदि प्रशासन की ओर से वास्तव में काम रोकने का निर्देश दिया गया था, तो उसका पालन सभी संबंधित पक्षों को समान रूप से करना चाहिए था। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या संबंधित अधिकारियों को कथित रूप से दोबारा काम शुरू किए जाने की जानकारी है? यदि जानकारी है, तो इस मामले में क्या कार्रवाई की जा रही है?
आस पड़ोस के लोग भी हैं परेशान
आए दिन इस मामले को लेकर हो रहे विवाद से आम लोग भी परेशान हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मौके पर काम रोकने के संबंध में क्या निर्देश दिए गए थे और क्या उनका पालन किया जा रहा है। वैसे बागबेड़ा थाना प्रभारी उमेश कुमार ठाकुर अपनी कार्यशाली, निष्पक्षता और न्याय के लिए जाने जाते हैं। जमशेदपुर के महत्वपूर्ण थानों में काम कर चुके थाना प्रभारी उमेश कुमार ठाकुर की अलग पहचान है। दोनों पक्षों को उनसे न्याय की उम्मीद है।
पप्पू सोनकर विकलांग है
पप्पू सोनकर ने बताया कि वह विकलांग है। पिता द्वारा कब्ज की गई रेलवे की जमीन में से उसे एक छोटी सी दुकान मिली थी। उसने बगल वाले की दुकान खरीद कर उसका विस्तार कर लिया है। पप्पू का कहना है कि उसकी चलती दुकान और बढ़ते व्यापार को देखकर भाइयों में जलन है। वे लोग पिता की कब्जा वाली जमीन पर उसका हक नहीं देना चाहते हैं।
भाइयों के बीच इतनी कटुता क्यों?
इतना तो कहा जा सकता है कि गुरुवार को हुई मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो और क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनी रहे।
अब देखना यह है कि बागबेड़ा थाना एवं संबंधित रेलवे प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।
