खरसावां शहीद वेदी पर पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने अर्पित की श्रद्धांजलि, आदिवासी अधिकारों की रक्षा का लिया संकल्प
श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा एवं उनकी पत्नी मीरा मुंडा ने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ 1 जनवरी 1948 को खरसावां गोलीकांड में शहीद हुए लोगों की स्मृति में स्थापित शहीद वेदी पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सभी लोग पदयात्रा कर शहीद स्थल पर पहुंचे। शहीद स्थल से बाहर निकलने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज़ादी के बाद भी आदिवासी समाज के बलिदानों से सरकारें ठोस सबक लेने में विफल रही हैं। जिन शहीदों ने अपने रक्त से इतिहास रचा, उनकी धरती आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रही है।
उन्होंने कहा कि आज़ादी से पहले आदिवासी समाज का संघर्ष अंग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध था, जिसमें भगवान बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हू, चांद जैसे अनेक महान नायकों ने अपने प्राण न्योछावर किए। लेकिन आज़ादी के बाद खरसावां की लाल मिट्टी ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि आदिवासी समाज के नैसर्गिक जीवन, संस्कृति और परंपराओं को समझे बिना स्वतंत्रता अधूरी है।
संविधान की मूल भावना के अनुरुप शासन व्यवस्था लागू नहीं
श्री मुंडा ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में आज भी संविधान की मूल भावना के अनुरूप शासन व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। पंचायत (अनुसूचित क्षेत्र विस्तार) अधिनियम—पेसा—के लागू होने के बावजूद उसकी नियमावली आदिवासी जीवन पद्धति और सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है, जो शहीदों के बलिदान की भावना के साथ अन्याय है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में शहरीकरण, खनन, बालू घोटाले और भूमि अधिग्रहण के माध्यम से आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और संस्कृति पर निरंतर हमला हो रहा है। गगनचुंबी इमारतों का निर्माण कर क्षेत्रों को शहरी घोषित करने की कोशिश, अनुसूचित क्षेत्र की पहचान मिटाने और आदिवासी अस्तित्व पर सीधा आक्रमण है।
आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहे
श्री मुंडा ने कहा कि जब पूरी दुनिया नव वर्ष का उत्सव मना रही है, तब हम शहीद वेदी पर फूल अर्पित कर यह संकल्प लेते हैं कि आदिवासी अधिकारों की रक्षा,जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए हमारा संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब शहीदों के सपनों के अनुरूप पेसा कानून की भावना को पूर्ण रूप से लागू किया जाएगा और आदिवासी समाज को उसकी देशज संस्कृति के साथ सम्मानपूर्वक आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
