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गुरुजी ने लोकसभा में कहा था, मेरी गर्दन ले लो, लेकिन आदिवासियों का झारखंड हमें दे दो : प्रमोद लाल

श्री दर्पण न्यूज, जमशेदपुर :  पूरे झारखंड ही नहीं देशभर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से शोक की लहर है। झारखंड राज्य की स्थापना से लेकर उसे सजाने, संवारने में गुरु जी की भूमिका अहम रही है। झारखंड आंदोलनकारी नेताओं में और गुरु जी के साथ रहकर आंदोलन को मुकाम तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाने वाले नेता प्रमोद लाल, पूर्व जिला अध्यक्ष सागेन पूर्ति, वरीय सदस्य सरोज महापात्र और पूर्व जिला अध्यक्ष फैयाज अहमद झारखंड मुक्ति मोर्चा की नेत्री कमलजीत कौर गिल समेत कई नेताओं ने गुरु जी के निधन को अपूरणीय क्षति बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी।

बगैर गुरुजी के झारखंड असहाय सा हो गया है: प्रमोद लाल 

झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय महासचिव और वरिष्ठ झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता प्रमोद लाल ने बताया की गुरु जी उन लोगों के गार्जियन स्वरूप थे। ऐसा लगता है कि सर से एक गार्जियन का साया उठ गया है। गुरुजी झामुमो को जन्म देने वालों में से थे। प्रमोद लाल ने याद करते हुए कहा कि गुरुजी ने ही उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा में ज्वाइन कराया था। जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित बागुन नगर में एक कार्यक्रम में वे झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल हुए थे। उस दौरान गुरु जी ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के लिए हमें शांतिपूर्वक आंदोलन करना है। सभी को इस आंदोलन में भागीदारी लेनी है। झारखंड हम सभी का है। जो भी यहां पले और बड़े हुए हैं सभी यहां के निवासी हैं। गुरुजी कभी चिंतित मुद्रा में नहीं दिखते थे ।पार्लियामेंट में एक बार उन्होंने कहा था कि मेरी गर्दन काट लो लेकिन आदिवासियों के लिए अलग झारखंड राज्य दे दो। आज गुरु जी की ही त्याग तपस्या और बलिदान का प्रतिफल झारखंड राज्य की स्थापना है।

झारखंड को समृद्ध संपन्न और विकसित राज्य बनाना गुरुजी का सपना

गुरु जी का झारखंड बनाने का अपना सपना था। झारखंड को समृद्ध संपन्न और विकसित राज्य के रूप में स्थापित किया जाना उनका लक्ष्य था। प्रमोद लाल ने कहा कि आज झारखंड की बागडोर गुरुजी के पुत्र हेमंत सोरेन के हाथ में है। वे राज्य को विकास की दिशा में ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए वे काम भी कर रहे हैं। प्रमोद लाल ने कहा की नेमार गांव का एक साधारण किसान का बेटा अपनी लड़ाई को अंजाम तक पहुंचने में सफल रहा था। गुरु जी के निधन से हमें व्यक्तिगत तौर पर गहरा आघात लगा है और एक असहाय सा महसूस कर रहा हूं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की की गुरु जी की आत्मा को असीम शांति प्रदान करें और उन्हें बैकुंठ में स्थान दें। इस तरह के नेताओं के त्याग और तपस्या से आज लाखों लोग अपनी जीविका चल रहे हैं। हम उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं।

झारखंड के लिये अपूर्णिय क्षति : कमलजीत कौर गिल

झारखंड मुक्ति मोर्चा की वरिष्ठ सदस्य और नेत्री कमलजीत कौर गिल ने भी गुरु जी के निधन को झारखंड के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने बताया कि झारखंड आंदोलन में उन्होंने गुरु जी की प्रेरणा से हिस्सा लिया और उन्हीं की प्रेरणा से आगे बढ़े।

गुरुजी आदर्श अभिभावक : सागेन पूर्ति

इसी तरह पूर्व जिला उपाध्यक्ष सागेन पूर्ति ने गुरु जी को एक आदर्श गार्जियन स्वरूप बताते हुए कहा कि उनके निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। वे आदिवासियों के ही नहीं पूरे समाज के नेता थे। वरिष्ठ झामुमो नेता सरोज महापात्र ने भी गुरु जी को प्रेरणा स्रोत बताया और उनके आदर्शों पर चलने की बात कही। उन्होंने कहा कि गुरु जी अदम्य साहस और कठिन परिश्रम वाले व्यक्ति थे। जिंदगी भर उनके कार्य प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

कमी पूरी नहीं की जा सकती : फैयाज 

वरिष्ठ नेताऔर झारखंड मुक्ति मोर्चा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष फैयाज खान ने भी गुरु जी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा की गुरु जी की कमी हमेशा झारखंड को खलेगी। उनकी कमी को कभी पूरा नहीं किया जा सकता है। वह जन-जन के नेता थे और जनमानस के दिलों में उनका अलग स्थान है।

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2 thoughts on “गुरुजी ने लोकसभा में कहा था, मेरी गर्दन ले लो, लेकिन आदिवासियों का झारखंड हमें दे दो : प्रमोद लाल

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