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हरेलाल महतो का जाना महज एक सामान्य घटना, संगठन पर नहीं पड़ेगा कोई असर: आजसू के केंद्रीय सचिव चंद्रगुप्त सिंह का बड़ा बयान

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर: झारखंड की राजनीति में आजसू पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हरेलाल महतो द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद उपजे राजनीतिक घटनाक्रम पर पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय सचिव चंद्रगुप्त सिंह ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने पार्टी के भीतर किसी भी प्रकार की उथल-पुथल या बेचैनी की अटकलों को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद सहज अंदाज में कहा कि राजनीति में नेताओं का आना-जाना एक निरंतर प्रक्रिया है। हरेलाल महतो के पार्टी छोड़ने से संगठन की साख और कार्यशैली पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

अपनी प्राथमिकताओं के आधार पर नेता लेते हैं फैसला

चंद्रगुप्त सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोकतांत्रिक और राजनीतिक व्यवस्था में कार्यकर्ता और नेता अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार फैसले लेते हैं। आगे भी कई नए चेहरे पार्टी से जुड़ेंगे और कुछ लोग अलग राह चुन सकते हैं, लेकिन इससे आजसू की मूल विचारधारा, जमीनी जुड़ाव और कार्यकर्ताओं के समर्पण पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।

निजी राजनीतिक महत्वाकांक्षा हो सकती है वजह

हरेलाल महतो के इस्तीफे के पीछे के कारणों पर चर्चा करते हुए चंद्रगुप्त सिंह ने कहा कि संभव है उन्हें किसी अन्य राजनीतिक दल या मंच पर अपना भविष्य अधिक सुरक्षित और संभावनाओं से भरा नजर आया हो। इसी व्यक्तिगत आकलन और महत्वाकांक्षा के कारण उन्होंने पार्टी से अलग होने का कदम उठाया होगा। उन्होंने दोहराया कि आजसू पार्टी अपने तय सांगठनिक लक्ष्यों, जनहित के मुद्दों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर धरातल पर पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ती रहेगी।

भाजपा में विलय की चर्चाओं और खुद के राजनीतिक भविष्य पर प्रतिक्रिया

आजसू के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में संभावित विलय को लेकर बाजार में तैर रही तरह-तरह की चर्चाओं पर सिंह ने कहा कि फिलहाल इस संबंध में उनके पास कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने एक परिपक्व राजनेता की भांति जोड़ा कि यदि भविष्य में परिस्थितियोंवश ऐसा कोई फैसला होता भी है, तो वह बिना किसी पद की लालसा के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में ही संगठन की सेवा करना पसंद करेंगे। उनके लिए पद या ओहदा कभी प्राथमिक नहीं रहा, बल्कि संगठन के प्रति निष्ठा और जनसेवा ही सर्वोपरि है।

अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वे 1973 से लगातार सार्वजनिक जीवन और राजनीति में सक्रिय हैं। इस आधी शताब्दी से अधिक लंबे सफर में वे जिस भी दल या भूमिका में रहे, वहां उन्होंने पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया। अब इस मोड़ पर उनके भीतर विधायक या सांसद बनने की कोई व्यक्तिगत लालसा शेष नहीं बची है।

चुनाव लड़ने की इच्छा नहीं: चंद्रगुप्त सिंह

जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की अपनी पुरानी इच्छा पर उठते सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लंबे समय तक पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास का गढ़ रहा है। वर्तमान में वहां से रघुवर दास की पुत्रवधू जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए उन्होंने अब इस चुनावी क्षेत्र से अपनी दावेदारी का विचार पूरी तरह छोड़ दिया है। वे वर्तमान स्थिति में पार्टी द्वारा मिल रहे सम्मान और जिम्मेदारियों से पूरी तरह संतुष्ट हैं।

राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था चिंता का विषय

झारखंड में बिगड़ती कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी और नशे की लत पर जताई गंभीर चिंता। राज्य के वर्तमान सामाजिक और प्रशासनिक परिदृश्य पर बात करते हुए चंद्रगुप्त सिंह ने झारखंड की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने राज्य में बढ़ते अपराध के मूल में युवाओं के बीच फैलती बेरोजगारी और नशीले पदार्थों की लत को सबसे प्रमुख कारण बताया।

उन्होंने कहा कि रोजगार के पर्याप्त अवसर न मिलने के कारण युवा निराशा के भंवर में फंस रहे हैं, जिससे वे तेजी से अपराध और नशे के काले कारोबार की गिरफ्त में आ रहे हैं।

आज के युवा में अनुशासनहीनता

इस सामाजिक गिरावट का सीधा असर परिवारों और पूरे समाज पर पड़ रहा है, जहां स्थिति यहां तक बिगड़ चुकी है कि कई युवा अपने माता-पिता के मार्गदर्शन को भी नकार रहे हैं।

चंद्रगुप्त सिंह ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह विकास की गति को तेज करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाए। यदि सरकार बेरोजगारी दूर करने और युवाओं को सही दिशा देने में सफल रहती है, तो राज्य की कानून-व्यवस्था में अपने आप व्यापक सुधार देखने को मिलेगा।

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