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एसडीओ कोर्ट के आदेश के खिलाफ निशांत सिंह की अर्जी को झारखंड हाईकोर्ट ने किया खारिज, स्पष्ट है कि सीजीपीसी द्वारा कराया गया चुनाव वैद्य माना जाएगा : भगवान सिंह

सीजीपीसी के वजूद को बचाने के लिए हम सदैव तत्पर, उच्च न्यायलय, जिला प्रशासन ने सीजीपीसी के संविधान को वैधता प्रदान की, लेकिन निशान सिंह ने नहीं 

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : एसडीओ कोर्ट के आदेश के खिलाफ निशान सिंह की याचिका को झारखंड हाई कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया है कि सीजीपीसी द्वारा पिछले दिनों साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का कराया गया चुनाव वैध्द है। दरअसल साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का टर्म पूरा होने के बाद सीपीसी उसका चुनाव करना चाहता था , लेकिन तत्कालीन प्रधान निशांत सिंह चुनाव कराने के पक्ष में नहीं थे। वे जबरन कार्यकाल को बढ़ाना चाह रहे थे । जिसके खिलाफ सीजीपीसी ने एसडीओ कोर्ट की शरण ली । एसडीओ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया की साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का अथवा जिले के किसी भी गुरुद्वारे की कमेटी का चुनाव कराया जाना और नहीं कराया जाना सीजीपीसी के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसलिए एसडीओ कोर्ट इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। सीजीपीसी चाहे तो साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में सीजीपीसी के संविधान के तहत करा सकता है। उसके बाद सीजीपीसी ने चुनाव की तिथि निर्धारित किया। जिला प्रशासन द्वारा चुनाव की देखरेख के लिए दंडाधिकारी की प्रतिनिधि की गई। दंडाधिकारी की देखरेख में सीजीपीसी का चुनाव संपन्न हुआ। मतगणना के बाद हरविंदर सिंह मंटू को प्रधान निर्वाचित घोषित किया गया। लेकिन निशांत सिंह लगातार मनमानी करते रहे। उन्होंने एसडीओ कोर्ट के इसी आदेश के खिलाफ झारखंड हाई कोर्ट में याचिका डाल दी। अंततः याचिका पर सुनवाई के बाद झारखंड हाईकोर्ट ने निशान सिंह की याचिका को खारिज करते हुए एसडीओ कोर्ट के आदेश को सही ठहराया। इस तरह एसडीओ कोर्ट के आदेश के आलोक में सीजीपीसी द्वारा कराया गया चुनाव पूरी तरह वैध है। ऐसे में हरविंदर सिंह मंटू साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान हैं। उन्हें पदभार सौप जाना चाहिये।

सवालों के जवाब में सीजीपीसी के प्रधान भगवान सिंह ने कहा कि अगर निशान सिंह सीजीपीसी के आदेश को नहीं मानेगे और साक्षी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान का प्रभार हरविंदर सिंह मंटू को अगर नहीं सौंपेंगे तो सीजीपीसी जिला प्रशासन का दरवाजा खटखटाएगा और अनुरोध करेगा कि निशान सिंह से साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान का कार्यालय खाली कराया जाए और विधिवत नवनिर्वाचित प्रधान हरविंदर सिंह मंटू को प्रभार सौपा जाए।

उल्लेखनीय है कि झारखंड हाईकोर्ट ने गत दिनों साकची गुरुद्वारा चुनाव से संबंधित दायर रिट याचिका को सेंट्रल गुरुद्वारा कमेटी द्वारा हाई कोर्ट में 8 जुलाई 2025 दिए गए एफिडेविट में दिए गए एनक्चर (बी) के अनुसार यह कहते हुए समाप्त (Disposed of) कर दिया है कि मामला पहले ही समाप्त हो चुका है तथा चुनाव प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है.

सीजीपीसी के संविधान के तहत कराया गया था साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का चुनाव : भगवान सिंह

उच्च न्यायालय के इस आदेश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव गुरुद्वारा के संविधान (By-Laws) के अनुसार तथा सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की देखरेख में विधिवत संपन्न हुए हैं. उक्त बातें सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह ने मीडिया से कही.

शुक्रवार को सीजीपीसी के दफ्तर में आयोजित प्रेसवार्ता में उन्होंने कहा कि साकची गुरुद्वारा साहिब की चुनाव प्रक्रिया को लेकर सच्चाई और स्पष्टता आपके सामने रखना चाहते हैं. हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन या विरोध करना नहीं है, बल्कि गुरुद्वारा प्रबंधन की व्यवस्था, मर्यादा और संविधान को बनाए रखना है.

तनाव के बाद मामला सीजीपीसी के पास पहुंचा 

हरविंदर सिंह मंटू वैद्य तरीके से चुने गए प्रधान

जब गुरुद्वारा में विवाद और तनाव की स्थिति बनी, तब मामला सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पास आया। प्रशासन, विशेष रूप से SDO द्वारा यह निर्देश दिया गया कि चुनाव गुरुद्वारा के संविधान (By-Laws) के अनुसार सेंट्रल कमेटी की देखरेख में कराए जाएं और कानून-व्यवस्था प्रशासन संभालेगा .

इसके बाद सेंट्रल कमेटी ने पूरी पारदर्शिता के साथ चुनाव प्रक्रिया शुरू की—नोटिस जारी किए गए, नामांकन लिए गए और बैलेट वोटिंग करवाई गई, जिसमें संगत के वोटों से हरविंदर सिंह मंटू को प्रधान चुना गया.

निशान सिंह चुनाव को चाहते थे रद्द करना

उन्होंने कहा कि यह भी महत्वपूर्ण है कि निशान सिंह हाईकोर्ट में इस उद्देश्य से गए थे कि SDO के आदेश को रद्द कराया जाए और सेंट्रल कमेटी को चुनाव कराने से रोका जाए, लेकिन हाईकोर्ट से उन्हें इस संबंध में कोई राहत प्राप्त नहीं हुई और याचिका को यह कहते हुए समाप्त कर दिया गया कि चुनाव प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी है और मामला पहले ही समाप्त हो चुका था. साथ ही, न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी को कोई आपत्ति है तो वह सिविल कोर्ट जा सकता है.

सीजीपीसी की गरिमा को बनाए रखना चुनौती 

भगवान सिंह ने कहा कि हम पुनः स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह किसी व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की गरिमा, अधिकार और व्यवस्था को बनाए रखने की लड़ाई है यदि आज इस व्यवस्था को कमजोर किया गया, तो भविष्य में किसी भी गुरुद्वारे में संविधान और अनुशासन को बनाए रखना कठिन हो जाएगा.

उन्होंने प्रशासन से अनुरोध किया कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए, लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई कमेटी को उसका कार्यभार संभालने में सहयोग प्रदान करें. उन्होंने संगत सहित सभी गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटियों और धार्मिक जत्थेबंदियों से अपील करते हुए कहा कि गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा बनाए रखें, शांति बनाए रखें और सच्चाई तथा कानून का साथ दें.

उच्च न्यायलय ने निशान सिंह की याचिका को कहीं से भी मान्य नहीं बताया : अधिवक्ता 

प्रेस वार्ता में उपस्थित प्रतिवादी के अधिवक्ता पंकज कुमार सिन्हा और उर्वशी सिन्हा ने भी न्यायलय के आदेश से पर्दा उठाया और सरल भाषा में पत्रकारों को कहा कि 28 मई 2025 को एसडीएम कोर्ट से सीजीपीसी को साकची का चुनाव कराने का जिम्मा सौंपा गया था. इससे नाराज होकर निशान सिंह हाईकोर्ट गए थे. इन्होंने एसडीएम के आदेश को चुनौती दी थी. इसके बाद एसडीएम के आदेश से सीजीपीसी ने चुनाव संपन्न कराया गया. इस मामले को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से छुपाया था. हमने इसकी जानकारी दी. इसी आधार पर न्यायलय ने उनकी याचिका को dispose (of) कर दिया गया. इसमें कहीं भी ये आदेश नहीं है कि निशान सिंह के चुनाव को मान्य किया जाता है. भगवान सिंह ने कहा कि जब हाईकोर्ट, एसडीएम, सभी गुरूद्वारे सीजीपीसी का संविधान समझ रहे हैं तो निशान सिंह को भी यह समझना चाहिए. प्रेसवार्ता में चेयरमैन सरदार शैलेन्द्र सिंह, गुरमीत सिंह, महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला, वरीय सलाहकार परविंदर सिंह सोहल भी उपस्थित थे.

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