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एमएमडीआर बिल के खिलाफ पोटका में झामुमो की दहाड़, संजीव सरदार के नेतृत्व में 5 हजार की भीड़ ने किया जोरदार प्रदर्शन

श्री दर्पण न्यूज़, जमशेदपुर : पोटका : केंद्र सरकार द्वारा पारित खान एवं खनिज (संशोधन) विधेयक (एमएमडीआर) के खिलाफ शनिवार को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने पोटका विधानसभा क्षेत्र में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पोटका प्रखंड मुख्यालय में करीब पांच हजार लोगों की भीड़ उमड़ी, जबकि जमशेदपुर प्रखंड मुख्यालय और डुमरिया प्रखंड मुख्यालय में हज़ारो लोगों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया। तीनों प्रखंडों में उमड़ी बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुषों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को व्यापक जनप्रदर्शन का रूप दे दिया।

पोटका में उमड़ा जनसैलाब, संजीव सरदार ने किया नेतृत्व

झामुमो पोटका प्रखंड कमेटी की ओर से आयोजित धरना-प्रदर्शन में ग्रामीण महिला-पुरुष बड़ी संख्या में पहुंचे। प्रदर्शन के बाद बीडीओ और सीओ को ज्ञापन सौंपकर एमएमडीआर बिल के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पोटका विधायक संजीव सरदार ने जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर झारखंड के अधिकारों के हनन का आरोप लगाया।

बोले विधायक – चुनाव में नहीं हरा सकी भाजपा तो अब षड्यंत्र से राज्य के खनिज पर क़ब्ज़ा करना चाहती है

विधायक ने कहा कि पिछले 2 विधानसभा चुनाव में भाजपा हेमंत सोरेन के नेतृत्व को नहीं हरा सकी तो अब षड्यंत्र से राज्य के खनिज पर क़ब्ज़ा करना चाहती है. केंद्र सरकार कथित तौर पर एक साजिश के तहत झारखंड के हितों और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावित करने के उद्देश्य से एमएमडीआर बिल लाई है। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर जनता को एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।

खनिज संपदा झारखंड की, अधिकार भी झारखंड का होना चाहिए : संजीव सरदार

संजीव सरदार ने कहा कि जिस तरह अलग झारखंड राज्य के आंदोलन के दौरान आम जनता अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरी थी, उसी तरह अब केंद्र की नीतियों के खिलाफ भी एकजुट होने का समय आ गया है। उन्होंने समाज के हर वर्ग से एमएमडीआर बिल के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

झारखंड की धरती के नीचे मौजूद खनिज संपदा यहां की पहचान और प्राकृतिक पूंजी है। इस संपदा पर झारखंड के हितों और अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। खनिज से होने वाली आय का लाभ झारखंड के विकास, यहां के गांवों और आम जनता तक पहुंचना चाहिए। जल, जंगल, जमीन और खनिज पर झारखंड के अधिकारों की रक्षा के लिए हम लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे। राज्य के हितों के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

जनकल्याणकारी योजनाएं बंद हो जाए, यही केंद्र की मानसिकता

विधायक ने कहा की केंद्र सरकार चाहती है की राज्य में माइया सम्मान योजना, पेंशन योजना, अबुआ आवास समेत अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं बंद हो जाए इसलिए यह षड्यंत्र कर रही ताकि आमलोगों को इन योजनाओं का लाभ नही मिल सके और राज्य सरकार में अस्थिरता पैदा हो. विधायक श्री सरदार ने कहा कि झारखंड की जनता के सहयोग से सड़क से सदन तक आंदोलन होगा, आज की भीड़ यह संकेत दे रही है कि झारखंड की जनता फिर से एक बार उलगुलान को तैयार है, यह शहीदों की धरती है हमेशा अपना अधिकार के लिए संघर्ष करती रहेगी.

तीनों प्रखंडों में हजारों लोगों ने दर्ज कराया विरोध

एमएमडीआर बिल के विरोध में पोटका विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखंड मुख्यालयों में एक साथ प्रदर्शन हुआ। पोटका में करीब 5 हजार, जमशेदपुर प्रखंड में और डुमरिया प्रखंड में हज़ारो हज़ार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। ग्रामीण महिला-पुरुषों की बड़ी भागीदारी के बीच कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारे लगाए और ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया।

34 पंचायतों से पहुंचे कार्यकर्ता

पोटका के कार्यक्रम में पर्यवेक्षक मोहन कर्मकार, वरिष्ठ नेता राजू गिरि, झारखंड आंदोलनकारी सुनील महतो, बबलू चौधरी, पूर्व पार्षद चंद्रावती महतो, हीरामनी मुर्मू, रजनी षांडगी, भुगलु टुडू, मुखिया कार्तिक मुर्मू, बाघराय सोरेन, दुखु मार्डी, सुधीर सोरेन, भुवनेश्वर सरदार, हितेश भगत, चक्रधर महतो, मो. जमाल, भूपति महतो, बनमाली महतो, बीरेन पात्र, मुखिया कार्तिक मुर्मू,मुखिया बाघराय सोरेन,पंसस दुखु मार्डी,पंसस दीपक भगत समेत पोटका की सभी 34 पंचायतों से कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।

संजीव सरदार के नेतृत्व में दिखी संगठन की ताकत

तीनों प्रखंडों में एक साथ हुए प्रदर्शन से झामुमो ने पोटका विधानसभा क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक सक्रियता और जनभागीदारी का प्रदर्शन किया। पोटका में पांच हजार लोगों की मौजूदगी वाले कार्यक्रम की अगुवाई विधायक संजीव सरदार ने की। बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी के बीच उन्होंने केंद्र की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की और कार्यकर्ताओं से आंदोलन को गांव-गांव तक ले जाने का आह्वान किया।

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