केरला समाजम मॉडल स्कूल में ओणम पर्व की धूम : करेलियन समुदाय के लोगों ने बड़ी संख्या में शिरकत की, भव्य दावत का आयोजन, 1000 से अधिक लोगों ने दावत का आनंद उठाया
श्री दर्पण न्यूज़ जमशेदपुर : (रामकंडे मिश्रा) की रिपोर्ट-
केरला समाजम मॉडल स्कूल गोलमुरी जमशेदपुर में आज ओणम पर्व बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। केरला समाज की महिलाओं,पुरुषों के अलावा युवाओं ने भी बड़ी संख्या में ओनम पर्व के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। रंगोलिया सजाई गई। साउंड बॉक्स में बज रहे हैं फिल्मी गानों की धुन पर लोगों ने डांस किया। स्वयं भी गाने गए । गीत संगीत का आनंद उठाया. ओणम पर्व की खुशियां एक दूसरे के साथ बांटी।
डॉक्टर शालिनी द्वारा बताई गई धार्मिक कथाओं पर आधारित जानकारी
प्राचीन धर्म ग्रंथो पर आधारित ओणम पर्व की मान्यता भगवान विष्णु और राजा महाबली की दानशीलता पर आधारित है। ओणम पर्व के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में भाग लेने पहुंची डॉक्टर शालिनी ने ओणम पर्व की मान्यताओं पर आधारित जानकारी साझा करते हुए बताया कि केरल में ओणम (Onam) पर्व मुख्य रूप से राजा महाबली के स्वागत और अच्छी फसल की उपज की खुश में मनाया जाता है. हिंदू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में केरल पर असुर राजा महाबली (मावेली) का शासन था. उनका शासनकाल बेहद न्यायपूर्ण, शांतिपूर्ण और समृद्धि से भरा था, जिसे केरल का स्वर्ण युग माना जाता है. उनकी बढ़ती लोकप्रियता और शक्ति को देखकर देवताओं में असुरक्षा की भावना पैदा हो गई.
राजा महाबली की दानशीलता
राजा महाबली से देवताओं के अस्तित्व को चुनौती मिलने लगी। ऐसे में देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार (एक बौने ब्राह्मण) का रूप धारण किया. वामन ने राजा महाबली से तीन पग (कदम) भूमि दान में मांगी. महाबली के हां कहते ही वामन ने विशाल रूप धारण कर पहले दो कदमों में पूरी धरती और आकाश को नाप लिया. तीसरे कदम के लिए जब कोई जगह नहीं बची, तो महाबली ने अपना वचन निभाने के लिए अपना सिर भगवान विष्णु के आगे झुका दिया.वामन ने उनके सिर पर पैर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया. हालांकि, महाबली की दानशीलता और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें एक वरदान दिया कि वे साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने धरती पर आ सकेंगे.
ओणम में राजा महाबली का केरल की धरती पर होता है आगमन
मान्यता है कि ओणम के दिनों में राजा महाबली अपनी प्रजा को देखने केरल आते हैं. इसलिए केरलवासी अपने प्रिय राजा के स्वागत में घरों को फूलों से सजाते हैं। भव्य दावत (ओणम सद्या) का आयोजन करते हैं. इस तरह ओणम पर्व राजा महाबली के स्वागत में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
टी एम एच के नर्सिंग कॉलेज की वाइस प्रिंसिपल के साथ-साथ एक अच्छी गायक भी हैं डॉक्टर शालिनी
डॉक्टर शालिनी स्वयं भी गीत संगीत में रुचि रखने वाली हैं। एक अच्छी गायक भी हैं। केरला समाजम समिति के वाइस प्रेसिडेंट वीनू कुमार की पत्नी डॉक्टर शालिनी मौकों पर केरेलियन भाषा के साथ-साथ हिंदी में भी गाना गाती हैं। डॉ शालिनी ने बताया कि ओणम मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है. संगम कालीन (Sangam Era) प्राचीन तमिल और मलयालम साहित्य की कड़ियों में इस त्योहार का उल्लेख मिलता है, जो दर्शाता है कि यह पर्व मध्यकाल या उससे भी पहले से केरल की संस्कृति का हिस्सा रहा है.
