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बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के मामले में विशेष उत्पाद न्यायालय, पटना से सम्मानपूर्वक बरी किए गए डॉक्टर अभिषेक मुंडू

श्री दर्पण न्यूज़ पटना: बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में विशेष उत्पाद न्यायालय, पटना में अंततः निर्दोष साबित किए गए डॉक्टर अभिषेक मुंडू।

अदालत ने सभी साक्ष्यों एवं अभिलेखों का परीक्षण करने के उपरांत डॉ. अभिषेक मुंडू को निर्दोष मानते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व सचिव डॉक्टर मृत्युंजय कुमार और स्वयं डॉक्टर अभिषेक मुंडू ने आज स्थानीय होटल में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर अदालती फैसले की जानकारी दी। डॉ अभिषेक मुंडू इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व सचिव रह चुके हैं। डॉ मृत्युंजय कुमार ने बताया कि अभियोजन पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को न्यायालय में प्रमाणित नहीं किया जा सका और सभी आरोप निराधार पाए गए। आरोपी डॉ अभिषेक मुंडू के पक्ष में एक भी साक्ष्य उपलब्ध नहीं था। आरोप सिद्ध नहीं होने के बाद अदालत ने

डॉ. मुंडू को दोषमुक्त घोषित किया। इस निर्णय के साथ उनके विरुद्ध लंबित आपराधिक कार्यवाही का समापन हो गया है।

एक साजिश के तहत डॉक्टर अभिषेक मुंडू की पद और प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाई गई

उल्लेखनीय है कि डॉक्टर अभिषेक मुंडू वर्ष 2021 के 24 दिसंबर को क्रिसमस के मौके पर अपने पिता के यहां जो पटना के गर्दनीबाग में रहते हैं सेलिब्रेटिंग में गए थे। तभी साजिश के तहत उन्हें एक झूठे ड्रग्स के मामले में फंसा कर बेइज्जत कर जेल भेज दिया गया था। आबकारी पुलिस ने डॉक्टर मुंडू के मान सम्मान को तो क्षति पहुंचाई ही, उनके डॉक्टरी पेसे को भी भारी आर्थिक नुकसान और प्रोन्नति जैसे मौके को गवना पड़ा था। आज डॉक्टर अभिषेक मुंडू जमशेदपुर के ईएसआई हॉस्पिटल में चीफ मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। एक सम्मानित परिवार और सम्मानित पेसे, पद और प्रतिष्ठा से जुड़े डॉक्टर अभिषेक की चिकित्सा जगत में अलग पहचान है। सुबह चाइल्ड स्पेशलिस्ट है। बिहार के मुजफ्फरपुर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने के बाद डॉक्टर अभिषेक मुंडू ने रांची के रिम्स से मेडिसिन में पोस्ट ग्रेजुएट भी किया है।

न्यायालय पर मेरा पूर्ण विश्वास रहा है – डॉक्टर अभिषेक मुंडू

अदालत के निर्णय के उपरांत डॉ. अभिषेक मुंडू ने कहा—”मुझे भारत की न्यायपालिका पर सदैव पूर्ण विश्वास रहा है।न्यायालय के इस निर्णय से सत्य की विजय हुई है। मैं न्यायालय का सम्मान करते हुए अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ववत पूरी निष्ठा, ईमानदारी एवं समर्पण के साथ करता रहूँगा।”

अपने दायित्वों का निष्ठा पूर्वक निर्वहन करता रहूंगा

उन्होंने यह भी कहा कि न्यायालय के निर्णय के आलोक में वे अपने सेवा संबंधी सभी वैधानिक अधिकारों, बकाया देयकों तथा सतर्कता (Vigilance) संबंधी औपचारिकताओं के शीघ्र निष्पादन की अपेक्षा रखते हैं।

यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता तथा विधि के शासन में विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करता है।

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